Monday, September 11, 2017


जाने कहाँ

ग़ज़लें जाने कहाँ खो गईं, नज़्में जाने कहाँ खो गईं 
जीवन के इन दो राहों पे, शामें जाने कहाँ खो गईं। 


आँधियारों से रोज़ लड़ाई, परवाने का खेल हो गई
खोज रहा था वो मंज़िल को, राहें जाने कहाँ खो गईं।

दूर नज़र आई वो मुझको, आहें जाने कहाँ खो गईं
वो जब मेरे पास खड़ी थी, सांसें जाने कहाँ खो गईं।

घड़ी जो करती टिक टिक टिक टिक, ख़ामोशी कि जुबां हो गई
यादों की मौजों में बहकर, रातें जाने कहाँ खो गईं।

दर पे तेरे खोए थे हम, धड़कन जाने कहाँ खो गई
रमा हुआ था 'मुरीद' तुझ में, बज़्में जाने कहाँ खो गईं।

__संकल्प सक्सेना 'मुरीद'।


नानाजी
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मेरे जीवन, मेरे लेखन के अभिन्न अंग,मेरे मार्गदर्शक ......उन्ही को समर्पित हैं ये जज़्बात जिन्हें शब्दों में नहीं बांधा जा सकता। 
आँखें नम हैं। 

मायूस है, उदास है,
ये कैसी अनमिट प्यास है 
सब कुछ है पास मगर 
कहाँ गए जज़्बात हैं।

क़लम है, स्याही, बूँद नहीं 
दर्द है, धड़कन नहीं 
पथराई सी आँखें हैं 
बेहता कोई जुनूं नहीं

आख़िर कब तक !

आख़िर कब तक ये अफ़साने 
बनते ही घुट जाएंगे 
मेरे भीतर खिलते खिलते 
फूल यूँही मुरझाएंगे।

जिनकी साँसें, जिनकी सीरत 
मुझ में प्यास जगाती थीं 
आज नहीं हैं पास मेरे वो 
गीत मेरे क्या गाएंगे ?
आँच नहीं है उन सांसों की 
दर्द कहाँ से लाएंगे।

अब तो बस यादों के दर्पण 
'मुरीद' समझ रहे हैं दर्शन 
पुंज प्रकाश तुम थे हमारे 
मेरे गीत तुम्ही को तर्पण। 
                                                 __संकल्प सक्सेना 'मुरीद'।

Wednesday, June 14, 2017




दिलों से उठती हैं, आँखों से बरसती हैं 
नूर की गलियों से, होकर वो गुज़रती हैं ।।

मौजें हैं, रवानी है, कुछ आँख में पानी है 
सागर की यही बूँदें, तूफ़ान उफ़नती हैं ।।

खोया हूँ तुझ ही में मैं , मंज़र ये निराला है 
बज़्म-ए -रुहानी में , साक़ी सी मचलती हैं ।।

रिंदों की मोहब्बत हैं, साक़ी की जवानी हैं 
हसरतें मेरे दिल की, मयख़ानों में सजती हैं ।।

'मुरीद' हूँ उनका, वो मेरे मुख़ातिब हैं 
बहकी है मेरी धड़कन, नब्ज़ समझती हैं ।।
                                        ___संकल्प सक्सेना 'मुरीद' ।

Tuesday, August 9, 2016


शुक्रिया 

मैं तुझे क्या दूँ , मोहब्बत के सिवा 
आशिक़ी क्या है, इबादत के सिवा ।। 

डोर है इश्क़ की बांधे हमको 
ये नशा क्या है, अक़ीदत के सिवा ।।

अश्क़ बहते हैं, दिल मचलता है 
ये वज़ा क्या है, विलादत के सिवा ।।

तू मेरा हर गुनाह माफ़ करे 
ये अदा क्या है, इनायत के सिवा ।।

वो हमें प्यार से, बुलाएं 'मुरीद'
ये अदा क्या है, नज़ाक़त के सिवा ।।
                                 __संकल्प सक्सेना 'मुरीद' ।
इबादत: पूजा। 
आशिक़ी: Passion

अर्धांगनी


मुझको मेरी अर्धांगनी स्वीकार कर 
भटका हुआ था मैं, मुझे स्वीकार कर 
मेरे ह्रदय की आग अब तू पार कर 
मेरे नयन की राह अब तू पार कर। 

मेरे हर इक खोए हुए एह्सास सुन 
जो बस रही थी मुझ में, वो हर श्वास सुन 
तुझको मिलेगी राह, मेरी आह सुन। 

फिर बह चलेंगी दिल की सब गहराइयाँ 
मेरे क़लम की वो करुण अंगड़ाइयाँ 
बजने लगेंगी फिर मधुर शहनाइयाँ

तू बूँद बनकर हर नदी को पार कर 
मेरे ह्रदय की आग अब तू पार कर 
मेरे नयन की राह अब तू पार कर
भटका हुआ था मैं, मुझे स्वीकार कर
मुझको मेरी अर्धांगनी स्वीकार कर। 
                                  __संकल्प सक्सेना 'मुरीद'।




मैंने तुम्हारे दिल से, वही बात कही है 
जो बात मेरे दिल में, सदियों से दबी है।।

आँखों में मेरे प्यार के, जज़्बात वही हैं 
जो हर जिगर के पार हो, ये बात वही है।।

मैं हूँ, ये शोख़ हुस्न है, ये रात वही है 
बरसात में निकल रहा, महताब यही है।।

दीवानगी में गा रहा, ये गीत पुराना 
मेरे लबों से बह रही, ये कैसी ख़ुशी है ।।

तुमको हमारे प्यार पर, क्यूँ हो न ऐतबार 
जो लिख रहे 'मुरीद' हैं वो, तूने ही दी है ।।
                                          __ संकल्प सक्सेना 'मुरीद' ।

Thursday, October 8, 2015


फ़नकार के हुनर में, तो कुछ और बात होती है 
वो आशिक़ी में डूबे, तो कुछ और बात होती है ।।

चांदनी तो तारों से भी होती है 
वहाँ चाँद आ जाए, तो कुछ और बात होती है ।।

कोई इन्सां इश्क़ से नहीं महरूम 
साथ जवानी हो, तो कुछ और बात होती है ।।

सागर -ओ- मीना की प्यास सबको है 
साथ साक़ी हो, तो कुछ और बात होती है ।।

चला तो हर 'मुरीद' है, मंज़िल की तरफ़ 
आँखों से बह चले, तो कुछ और बात होती है ।।
                                       __संकल्प सक्सेना 'मुरीद' ।