Wednesday, June 14, 2017




दिलों से उठती हैं, आँखों से बरसती हैं 
नूर की गलियों से, होकर वो गुज़रती हैं ।।

मौजें हैं, रवानी है, कुछ आँख में पानी है 
सागर की यही बूँदें, तूफ़ान उफ़नती हैं ।।

खोया हूँ तुझ ही में मैं , मंज़र ये निराला है 
बज़्म-ए -रुहानी में , साक़ी सी मचलती हैं ।।

रिंदों की मोहब्बत हैं, साक़ी की जवानी हैं 
हसरतें मेरे दिल की, मयख़ानों में सजती हैं ।।

'मुरीद' हूँ उनका, वो मेरे मुख़ातिब हैं 
बहकी है मेरी धड़कन, नब्ज़ समझती हैं ।।
                                        ___संकल्प सक्सेना 'मुरीद' ।

Tuesday, August 9, 2016


शुक्रिया 

मैं तुझे क्या दूँ , मोहब्बत के सिवा 
आशिक़ी क्या है, इबादत के सिवा ।। 

डोर है इश्क़ की बांधे हमको 
ये नशा क्या है, अक़ीदत के सिवा ।।

अश्क़ बहते हैं, दिल मचलता है 
ये वज़ा क्या है, विलादत के सिवा ।।

तू मेरा हर गुनाह माफ़ करे 
ये अदा क्या है, इनायत के सिवा ।।

वो हमें प्यार से, बुलाएं 'मुरीद'
ये अदा क्या है, नज़ाक़त के सिवा ।।
                                 __संकल्प सक्सेना 'मुरीद' ।
इबादत: पूजा। 
आशिक़ी: Passion

अर्धांगनी


मुझको मेरी अर्धांगनी स्वीकार कर 
भटका हुआ था मैं, मुझे स्वीकार कर 
मेरे ह्रदय की आग अब तू पार कर 
मेरे नयन की राह अब तू पार कर। 

मेरे हर इक खोए हुए एह्सास सुन 
जो बस रही थी मुझ में, वो हर श्वास सुन 
तुझको मिलेगी राह, मेरी आह सुन। 

फिर बह चलेंगी दिल की सब गहराइयाँ 
मेरे क़लम की वो करुण अंगड़ाइयाँ 
बजने लगेंगी फिर मधुर शहनाइयाँ

तू बूँद बनकर हर नदी को पार कर 
मेरे ह्रदय की आग अब तू पार कर 
मेरे नयन की राह अब तू पार कर
भटका हुआ था मैं, मुझे स्वीकार कर
मुझको मेरी अर्धांगनी स्वीकार कर। 
                                  __संकल्प सक्सेना 'मुरीद'।
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मैंने तुम्हारे दिल से, वही बात कही है 
जो बात मेरे दिल में, सदियों से दबी है।।

आँखों में मेरे प्यार के, जज़्बात वही हैं 
जो हर जिगर के पार हो, ये बात वही है।।

मैं हूँ, ये शोख़ हुस्न है, ये रात वही है 
बरसात में निकल रहा, महताब यही है।।

दीवानगी में गा रहा, ये गीत पुराना 
मेरे लबों से बह रही, ये कैसी ख़ुशी है ।।

तुमको हमारे प्यार पर, क्यूँ हो न ऐतबार 
जो लिख रहे 'मुरीद' हैं वो, तूने ही दी है ।।
                                          __ संकल्प सक्सेना 'मुरीद' ।

Thursday, October 8, 2015


फ़नकार के हुनर में, तो कुछ और बात होती है 
वो आशिक़ी में डूबे, तो कुछ और बात होती है ।।

चांदनी तो तारों से भी होती है 
वहाँ चाँद आ जाए, तो कुछ और बात होती है ।।

कोई इन्सां इश्क़ से नहीं महरूम 
साथ जवानी हो, तो कुछ और बात होती है ।।

सागर -ओ- मीना की प्यास सबको है 
साथ साक़ी हो, तो कुछ और बात होती है ।।

चला तो हर 'मुरीद' है, मंज़िल की तरफ़ 
आँखों से बह चले, तो कुछ और बात होती है ।।
                                       __संकल्प सक्सेना 'मुरीद' । 

Monday, June 1, 2015



मेरी ज़िन्दगी के इस बेशक़ीमती पल ने आज गीत की शक़्ल इख़्तियार की है। आप सभी से मुख़ातिब है।
 
वो मेरी हुई जा रही थी
 
वो मेरी हुई जा रही थी
सब कुछ छोड़, चली आ रही थी।
 
सालों का सफ़र, अपनों का नगर
वो गालियां, रुआंसी हुई जा रही थीं
सब कुछ छोड़, चली आ रही थी।
 
मेरी ज़िन्दगी का, वो प्यार सा दिन था
मेरे इस सफ़र का, सितारा भी संग था
फिर भी, चमन में नमी छा रही थी
अश्क़ों को मेरे, वो तड़पा रही थी
सब कुछ छोड़, चली आ रही थी।
 
कभी उसको देखूं, तो ये सोचता हूँ
नज़र की किंवाड़ों, पे क्या देखता हूँ
जो ठहरे पलक पे, वो उसके हैं अपने
छलकते हैं, आँखों से, यादों के लम्हें
तज कर, सज कर चली आ रही थी।
 
वो मेरी हुई जा रही थी
सब कुछ छोड़, चली आ रही थी।
                                                   __संकल्प सक्सेना 'मुरीद'।



जीवन 
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सूरज तू उगता है, आँखों का तारा बनकर 
जीवन तू चलता है, नदिया की धारा बनकर।।

चढ़ती धूप सुहानी, हर दिन की यही कहानी 
माझी, पार है जाना, अपनों का प्यारा बनकर।।

खिलती हुई ये कलियाँ, महकी हुई जवानी 
इन पर ना इतराना, जाएगा बेचारा बनकर।।

नमी है इन आँखों में, सीली हुई हैं राहें 
रोया इन राहों में, वो बादल आवारा बनकर।।

इश्क़ का अफ़साना, आशिक़ का यही फ़साना 
'मुरीद' धुन में गाना, तुम जीवन, इकतारा बनकर।।
                                                          __संकल्प सक्सेना 'मुरीद'।